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09 अगस्त 2016

वीर्य को जल्दी गिरने से रोकने के 5 रामबाण घरेलु उपाय, जरूर अपनाए…..

वीर्य का जल्दी गिरना आजकल एक आम समस्या बन गई है। जिसकी मुख्य वजह हैं युवाओं में टेंशन का अधिक लेना, गलत साहित्य पढ़ना, गंदी फिल्में देखना व सही तरह का खान-पान न करना आदि है। यदि आप भी इस तरह की समस्या से परेशान हैं तो आप आयुर्वेद में दिए गए कुछ उपायों को अपने घर पर ही बनाकर इस परेशानी से ठीक हो सकते हों। शीध्रपतन जैसी समस्याओं से बचने के लिए वैदिक वाटिका आपको बता रही है आसान नुस्खे।

17 जुलाई 2015

औषधीय गुणों से भरपूर हैं प्याज और लहसुन


एक प्रश्न पूछा मित्र ने कि यदि मान लें कि हिन्दू, मुस्लिम, सिख ईसाई नाम के दड़बों से मुक्त होकर सभी आदिवासियों, पशु-पक्षियों व सम्पूर्ण ब्रम्हांड समस्त ग्रहों व नक्षत्रों की तरह सनातन धर्म अपना लें और एक ही ईश्वर  या सूर्य, चन्द्र, या वायु, जल के उपासक हो जाएँ, धर्म और जाति के सभी भेद मिट जाएँ... तो क्या यह नफरत और हिंसा रुक जायेगी ?

उत्तरः न नफरत रुकेगी और न ही हिंसा रुकेगी, न ही भेदभाव समाप्त होंगे सभी कुछ वैसे ही चलता रहेगा | बस अंतर इतना ही पड़ेगा कि अब लोग दड़बों के नाम पर नहीं लड़ेंगे लेकिन रास्ते दूसरे खोज लेंगे | जैसे शाकाहारी और माँसाहारियों में युद्ध हुआ करेगा जैसे कि पहले होता था शैव-वैष्णव, हिन्दू-मुस्लिम में | प्याज खाने वाले और प्याज न खाने वाले आपस में लड़ेंगे | लहसुन खाने वाले और लहसुन न खाने वाले आपस में लड़ेंगे | जो लहसुन प्याज नहीं खाते वे खुद को ईश्वर का करीबी बताएँगे और जो लहसुन-प्याज खाते हैं उनके भाग्य बताया और बनाया करेंगे | लहसुन-प्याज न खाने वाले समाज में उच्चवर्ग माने जायेंगे, और वे लोग लहसुन-प्याज खाने वालों को अधर्मी मानेंगे उनकी जमीनें हथियाया करेंगे |

लहसुन-प्याज खाने वालों को नरक की आग में जलना पड़ेगा और जो नहीं खाते उनके लिए स्वर्ग की टिकट बुक रहेगी....... और आश्चर्य यह है कि लहसुन और प्याज दोनों ही औषधीय गुणों से भरपूर कंदमूल हैं अर्थात भूमि के भीतर फलने वाले फल/बीज जैसे आलू, गाजर.. आदि | ~विशुद्ध चैतन्य

29 अप्रैल 2015

1 मिनट में रोके हार्ट अटैक; लालमिर्च



अगर आप किसी को भी हार्ट अटैक आते देखते हैं तो एक चम्मच लाल मिर्च एक ग्लास पानी में घोलकर मरीज को दे दीजिए। एक मिनट के भीतर मरीज की हालत में सुधार आ जाएगा। इस घोल का असर सिर्फ एक अवस्था में होता है जिसमें मरीज का होश में होना आवश्यक है।

ऐसे हालात जिनमें मरीज बेहोशी की हालत में हो दूसरे उपाय को अपनाया जाना बेहद जरूरी है। लाल मिर्च का ज्यूस बनाकर इसकी कुछ बूंदें मरीज की जीभ के नीचे डाल देने से उसकी हालत में तेजी से सुधार आता है।

लाल मिर्च में एक शक्तिशाली उत्तेजक पाया जाता है। जिसकी वजह से इसके उपयोग से ह्रदय गति बढ़ जाती है। इसके अलावा रक्त का प्रवाह शरीर के हर हिस्से में होने लगता है। इसमें हेमोस्टेटिक (hemostatic) प्रभाव होता है जिससे खून निकलना तुरंत बंद हो जाता है। लाल मिर्च के इस प्रभाव के कारण हार्ट अटैक के दौरान मरीज़ को ठीक होने में मदद मिलती है।

हार्ट अटैक से बचाव के लिए तुंरत उपयोग करने हेतु एक बेहद कारगर घोल बनाकर रखा जा सकता है। लाल मिर्च पाउडर, ताज़ी लाल मिर्च और वोदका (50 % अल्कोहल के लिए) के इस्तेमाल से यह घोल तैयार किया जाता है।

कांच की बोतल में एक चौथाई हिस्सा लाल मिर्च से भर दीजिए। इस पाउडर के डूबने जितनी वोदका इसमें मिला दीजिए। अब मिक्सर में ताजी लाल मिर्च को अल्कोहल के साथ में सॉस जैसा घोल तैयार कर लीजिए। इस घोल को कांच की बोतल में बाकी बचे तीन चौथाई हिस्से में भर दीजिए। अब आपकी बोतल पूरी तरह से भर चुकी है। कांच की बोतल को कई बार हिलाइए। इस मिश्रण को एक अंधेरी जगह में दो हफ्तों के लिए छोड दीजिए। दो हफ्तों बाद इस मिश्रण को छान लीजिए। अगर आप ज्यादा असरकारक मिश्रण चाहते हैं तो इस घोल के तीन माह के लिए अंधेरी जगह पर छोड़ दीजिए।

हार्ट अटैक आने के बाद होश में बने रहने वाले मरीज़ को इस मिश्रण की 5 से 10 बूंदें दी जानी चाहिए। 5 मिनट के अंतराल के बाद फिर से उतनी मात्रा में यह घोल मरीज को दिया जाना चाहिए। 5 मिनिट के अंतराल के साथ मरीज की हालत में सुधार आने तक यह प्रक्रिया दोहराई जा सकती है। अगर मरीज बेहोश है तो उसकी जीभ के नीचे इस मिश्रण की 1 से 3 बूंदे डाल दी जानी चाहिए। इस प्रक्रिया को तब तक दोहराया जाना चाहिए जब तक मरीज की हालात में सुधार न आ जाए।



वैज्ञानिक शोधों से साबित हो चुका है लाल मिर्च में 26 अलग प्रकार के पोषक तत्व पाए जाते हैं। कैल्शियम, ज़िंक, सेलेनियम और मैग्निशियम जैसे शक्तिशाली तत्वों से भरपूर लाल मिर्च में कई मिनरल के अलावा विटामिन सी और विटामिन ए की भी भरपूर मात्रा होती है। हर भारतीय घर में मसाले का अभिन्न हिस्सा लाल मिर्च में ह्रदय को स्वस्थ रखने के कुछ बेहद खास और विस्मयकारी गुण पाए जाते हैं। किसी भी तरह की ह्रदय संबंधी समस्या से बचने में लाल मिर्च बहुत कारगर है।


Courtesy: webduniya









06 जनवरी 2014

मजदूरों का बनाया अस्पताल, फीस बस 5 रुपए!

दल्ली और राजहरा लौह अयस्क की खदानों के लिए मशहूर हैं। भारत सरकार के उपक्रम स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड यानी सेल के भिलाई इस्पात संयंत्र के लिए 1955 से दल्ली राजहरा की खदानों से ही लौह अयस्क का निर्यात होता रहा है।लेकिन दल्ली राजहरा 70 के दशक में तब चर्चा में आया, जब यहां शंकर गुहा नियोगी ने अपने मजदूर संगठन का काम शुरू किया। नियमित मजदूरों की तरह ही बोनस समेत दूसरी सुविधाओं के लिए पहली बार छत्तीसगढ खान मजदूर संगठन के बैनर तले 10 हजार से अधिक मजदूर सडक पर उतरे।आंदोलन परवान चढा और शंकर गुहा नियोगी के सपने भी। महिलाओं और युवाओं के लिए तो नियोगी ने कार्यक्रम बनाया ही, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी श्रमिक संगठन ने काम शुरू किया।एक महिला मजदूर साथी कुसुमबाई को प्रसव के समय इलाज नहीं मिला और उनकी मौत हो गई तो नियोगी ने महिलाओं के प्रसव संबंधी इलाज के लिए एक डिस्पेंसरी खोलने का निर्णय लिया।109 मजदूरों का स्वास्थ्य संगठन बना और 1980 के आसपास एक बंद पडी गैराज में डिस्पेंसरी शुरू की गई।उस वक्त कोलकाता से चिकित्सा की डिग्री लेकर मजदूरों के बीच काम करने पहुंचे डॉक्टर शैवाल जना के बालों में अब सफेदी आ गई है पर अपने पुराने दिन याद कर उनकी आंखों में चमक आ जाती है।शैवाल जना कहते हैं, "हमारा दो नारा था। पहला- मेहनतकशों के स्वास्थ्य के लिए मेहनतकशों का अपना कार्यक्रम और दूसरा-स्वास्थ्य के लिए संघर्ष। हम गांव-गांव जाते और लोगों में स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता फैलाने का काम करते थे।"


मजदूरों का अस्पताल


फिर मजदूरों के पैसे से डिस्पेंसरी के लिए कमरे बनने शुरू हुए। दिन या रात की पाली में खदान मजदूर अस्पताल की बिल्डिंग बनाने में मदद करते थे। मजदूरों के पैसे से ही बिल्डिंग के लिये जरूरी सामान खरीदे जाते।


भिलाई इस्पात संयंत्र से सेवानिवृत्त होने के बाद शहीद अस्पताल में काम करने वाले पुनाराम कोठवार बताते हैं कि नियोगी जी चाहते थे कि अस्पताल में सारी सुविधाएं हों, लेकिन वह यह देखने के लिए नहीं रहे।


28 सितंबर 1991 को शंकर गुहा नियोगी की हत्या हो गई। कुछ साल बाद लगा कि सब कुछ खत्म हो गया पर मजदूर फिर एकजुट हुए। हक के लिए फिर लडाई शुरू हुई और लडाई का एक हिस्सा यह अस्पताल भी था।


नियोगी नहीं हैं, लेकिन उनके सपने का अस्पताल तैयार हो गया। अस्पताल में जगह-जगह नियोगी की तस्वीरें टंगी हैं और उनके संदेश भी।


70 के दशक में आंदोलन के दौरान मारे गए 11 मजदूरों की याद में बने इस शहीद अस्पताल में आज हर दिन औसतन 250 नए मरीज ओपीडी पहुंचते हैं। अस्पताल के पास अपना सुविधायुक्त ऑपरेशन थिएटर हैं तो रेडियोलॉजी, पैथॉलाजी लैब समेत जांच और इलाज की अधिकांश सुविधाएं भी। अलग-अलग तरह के मरीजों के लिए अलग-अलग वार्ड तो हैं ही।

फीस बस 5 रुपए

मरीजों से आरंभिक इलाज के लिए 5 रुपए लिए जाते हैं। अस्पताल में भर्ती होने पर रोज के पांच रुपए बिस्तर के लिए और 25 रुपए सेवा शुल्क के नाम पर लिए जाते हैं। अस्पताल में सर्जन समेत छह डॉक्टर नियमित तौर पर रहते हैं। मरीजों के लाने-ले जाने के लिए अस्पताल के पास अपनी एंबुलेंस भी है।

प्रसव के लिए पडोसी जिले कांकेर के कच्चे गांव से पहुंची सोना बाई नेताम के पति कहते हैं, "ऐसी सुविधा हमें और कहां मिलेगी। सरकारी अस्पतालों में तो आप धक्के खाते रहिए। डॉक्टर तो डॉक्टर, कोई नर्स भी आपको नहीं पूछेगी।"

शुरुआती दिनों में अस्पताल में केवल खदान मजदूर और उनके परिजन ही आते थे, अब आसपास के सौ किलोमीटर के दायरे के दूसरे लोग भी यहीं का रुख करते हैं।

अस्पताल का पूरा प्रबंधन 13 मजदूरों की कमेटी संभालती है। इसके अलावा अस्पताल में कार्यरत 76 दूसरे कर्मचारी भी इस प्रबंधन की आमसभा के सदस्य हैं।

अस्पताल की ज्य़ादातर नर्स और दूसरे कर्मचारी स्थानीय हैं, जिनके प्रशिक्षण का काम लगातार चलता रहता है। नर्सों को एक साल का प्रशिक्षण दिया जाता है, उसके बाद वे नर्सें अपनी सुविधानुसार ग्रामीण इलाकों में जाकर काम करती हैं।

दोर्रीठेमा गांव की दिव्या को आठ महीने हो गए और प्रशिक्षण के बाद वे कहीं और जाकर काम करना चाहती हैं। मगर पिछले 22 साल से अस्पताल में काम कर रहीं सुलेखा सिंह इस बारे में सोचती भी नहीं।
उन्हें हर महीने बीमा और भत्तों के अलावा किसी भी सरकारी कर्मचारी की तरह दूसरी सुविधाएं तो मिलती ही हैं, 10 हजार रुपए से ज्यादा वेतन भी मिलता है।

मुश्किलें

अस्पताल चलाने के लिए किसी तरह का फंड नहीं लिया जाता। सारा खर्च अस्पताल प्रबंधन और श्रमिक संगठन उठाता है पर अस्पताल के निदेशक शैवाल जना के सामने दो बडी समस्याएं हैं।

वह बताते हैं कि पिछले पांच साल से उनका अस्पताल ब्लड बैंक के लिए प्रयासरत है लेकिन सरकारी अनुमति नहीं मिली है। इस कारण रोज के दर्जन भर से ज्यादा ऑपरेशनों में मुश्किल आती है। नए कानून से भी वे परेशान हैं।

शैवाल जना कहते हैं, "सरकार नर्सिंग एक्ट लाने वाली है। इसके बाद दिक्कत यह होगी कि गांवों में प्रारंभिक उपचार के लिए हम जिन सैकडों लोगों को साल भर का प्रशिक्षण देते हैं, वह हमें बंद करना पडेगा। नतीजतन गांव के लोगों को प्रारंभिक उपचार के लिए भी अस्पताल तक आना पडेगा।"

16 दिसंबर 2013

मधुमेह से बचने के लिए दिनभर में कम-से-कम चार कप चाय पीनी चाहिए.

नई दिल्ली के दरियागंज इलाके के मेन रोड पर बहुत ही करीने से सजी एक दुकान है. यह लगभग तीन दशक पुरानी है और इस पर चाय मिलती है. ऐसी-वैसी चाय नहीं बल्कि यह देश का पहला टी पार्लर है, जहां चाय बेचना कोई पेशा नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति को पेश करना है. यहां पहले चाय टेस्ट करवाई जाती है, उसके बाद आप चाहें तो उसे खरीदें और अच्छी न लगे तो आपकी मर्जी. आप की पसंद को 1981 में शुरू करने वाले इसके मास्टर टेस्टर संजय कपूर कहते हैं, ‘‘हमारा काम लोगों को अच्छी चाय पिलाना है. उन्हें सुकून के कुछ लम्हे गुजारने का मौका देना है. इसलिए उनके संतुष्ट होने पर ही हम उन्हें खरीदने के लिए कहते हैं.’’

वाकई ऐसा सिर्फ भारत में ही हो सकता है, जहां चाय पिलाने के मायने कुछ लम्हे फुरसत के गुजारना है तो भाग-दौड़ से खुद को ताजादम करना भी है. भारत दुनिया की चाय का एक-तिहाई उत्पादन करता है और ब्लैक टी का यह सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है. दार्जिलिंग की पहाडिय़ों और असम की वादियों में पैदा होने वाली चाय का कोई जवाब नहीं है. दार्जिलिंग की चाय अपने फ्लेवर और असम की चाय अपने कड़कपन के लिए पहचानी जाती है. टी बोर्ड ऑफ इंडिया के चेयरमैन एम.जी.वी.के. भानु कहते हैं, ‘‘भारत में चाय उत्पादन का 95 फीसदी असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल से आता है जबकि बाकी का 5 फीसदी त्रिपुरा, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, बिहार, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, मणिपुर, नगालैंड और मेघालय से आता है.’’

यूं मिली हमें चाय
चाय के इतिहास के साथ बड़ी ही दिलचस्प कहानी जुड़ी हुई है. बात चार हजार साल पुरानी है. चीन का एक बादशाह हुआ करता था, जिसका नाम शिन नोंग था. एक बार वह शिकार पर गया और थककर पेड़ के नीचे आराम कर रहा था. पास ही उसके लिए पानी उबल रहा था. तभी पास ही के पड़े की कुछ पत्तियां उसमें आ गिरीं. पानी उबला बादशाह ने पीया और उसकी सारी थकान दूर हो गई और वह अपने साथ जाते हुए उस पेड़ की कुछ पत्तियां ले गया. इस तरह एक ऐसे पेय पदार्थ ने हमारे जीवन में कदम रखा, जिसने हमें कुछ पल सुकून से बिताने और बतियाने के अलावा सेहतमंद होने की दिशा में बढ़ाने के भी दिए. खास यह कि आखिर वह क्या तत्व था जिसने बादशाह नोंग की सुस्ती दूर भगा दी तो कपूर बताते हैं,‘चाय में थियानिन होता है. जिससे दिमाग में अलर्टनेस आती है और सुकून मिलता है. इससे ताजगी का एहसास होता है.’’

ग्रीन टी या ब्लैक टी?
भारत में ब्लैक टी लोग अधिक मात्रा में इस्तेमाल करते हैं जबकि चीन में ग्रीन टी पीने वालों की संख्या अधिक है. चाय तीन प्रकार की होती है और ये तीनों अपनी अवस्था पर निर्भर करती हैं. कपूर बताते हैं, ‘‘ग्रीन, ऊलोंग और ब्लैक टी. जीरो ऑक्सीडाइज्ड वाली पत्ती ग्रीन टी होती है, हाफ ऑक्सीडाइज्ड पत्ती ऊलोगं टी होती है जबकि फुल ऑक्सीडाइज्ड को ब्लैक टी कहते हैं.’’ भारत में अकसर ब्लैक टी को दूध और चीनी के साथ लिया जाता है जबकि ग्रीन टी में इनका बिलकुल भी इस्तेमाल नहीं होता है.

विशेषज्ञ मानते हैं कि चाय में ज्यादा दूध डालने से बचना चाहिए क्योंकि इससे चाय के अधिकतर औषधीय तत्व मर जाते हैं. इसलिए दिन में एक-दो कप बिना चीनी और दूध के भी लेने चाहिए. असम की टी-रिसर्च एसोसिएशन के वैज्ञानिक डॉ. देवजीत बोरठाकुर कहते हैं, ‘‘शरीर के लिए फायदेमंद एंटी ऑक्सिडेंट थियाफ्लेविन और थियारबिगिन्स चाय में मौजूद मिल्क प्रोटीन के साथ जटिल संरचनाएं बना लेते हैं. यही वजह है कि दूध की चाय पीने वालों को न तो इनका फायदा मिलता है और न ही मिल्क प्रोटीन का फायदा मिलता है. इसलिए बगैर दूध की चाय लेना ही सेहत के लिए बेहतर होता है.’’

एंटी ऑक्सिडेंट थियाफ्लेविन और थियारबिगिन्स मोटापे के साथ-साथ कोलेस्ट्रॉल कम करने में भी सहायक होते हैं. जहां तक सवाल ब्लैक और ग्रीन टी का है तो यह जायके की बात है कि कौन-सी चाय पी जाए. विशेषज्ञों के मुताबिक इनसे होने वाले फायदों में सिर्फ उन्नीस-बीस का अंतर हो सकता है, इससे ज्यादा नहीं है.

स्वाद और सेहत भरा जायका
भारत में यह मिथक है कि चाय पीने से रंग काला होता है. विशेषज्ञ इस मिथक को सिरे से खारिज कर देते हैं. उनका कहना है कि चाय में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट त्वचा के लिए फायदेमंद होते हैं. वैज्ञानिकों की मानें तो एक प्याला चाय किसी अमृत से कम नहीं है. चीन में 1,000 महिलाओं पर हुए एक शोध में साबित हुआ है कि महिलाओं के लिए गंभीर खतरा बने गर्भाशय कैंसर का जोखिम चाय पीने से कम हो जाता है. इस शोध का नेतृत्व करने वाले कर्टिन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के प्रोफेसर एंडी ली कहते हैं, ‘‘आप कितनी मात्रा में और कितनी बार चाय पीते हैं यह भी मायने रखता है. एक दिन में आप जितने ज्यादा कप चाय पीएंगे नतीजा उतना ही अच्छा होगा (यानी गर्भाशय के कैंसर का जोखिम उतना ही कम होगा).’’

डायबिटीज में भी चाय फायदेमंद होती है. जर्मनी की हेनरिक हेन यूनिवर्सिटी के लेबनिज सेंटर फॉर डायबिटीज रिसर्च में हुए एक शोध के मुताबिक मधुमेह से बचने के लिए दिनभर में कम-से-कम चार कप चाय पीनी चाहिए. अब तक चाय पर हुए ज्यादातर शोध ग्रीन-टी पर केंद्रित थे. लेकिन शोधकर्ताओं ने पाया है कि ब्लैक-टी भी कम फायदेमंद नहीं होती.

ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक शोध बताता है कि ब्लैक-टी के ज्यादा सेवन का संबंध मोटापा कम होने से है. इसके पीछे अनुसंधानकर्ताओं का यह सोचना है कि ग्रीन-टी के ब्लैक-टी में बदलने की प्रक्रिया जिसे फर्मंटेशन कहते हैं, के दौरान सेहत के लिए फायदेमंद ‘फ्लेवेनॉइड’ विकसित हो जाते हैं. भारत के टी-बोर्ड का भी मानना है कि ग्रीन-टी के मुकाबले ब्लैक-टी ज्यादा ऑक्सिडाइज्ड होती है. बेशक बहस कोई भी रहे लेकिन इस बात को कोई झुठला नहीं सकता कि ऑफिस हो या घर, सुकून के कुछ लम्हे गुजारने में अकसर हमारी साथी चाय ही होती है.

Courtesy: Aajtak

23 जुलाई 2013

जो डर गया समझो मर गया ! सांप के काटने पर बचाव के लिए राजीव दीक्षित जी की सलाह |


दोस्तो सबसे पहले साँपो के बारे मे एक महत्वपूर्ण बात आप ये जान लीजिये ! कि अपने देश भारत मे 550 किस्म के साँप है ! जैसे एक cobra है ,viper है ,karit है ! ऐसी 550 किस्म की साँपो की जातियाँ हैं ! इनमे से मुश्किल से 10 साँप है जो जहरीले है सिर्फ 10 ! बाकी सब non poisonous है! इसका मतलब ये हुआ 540 साँप ऐसे है जिनके काटने से आपको कुछ नहीं होगा !! बिलकुल चिंता मत करिए !

लेकिन साँप के काटने का डर इतना है (हाय साँप ने काट लिया ) और कि कई बार आदमी heart attack से मर जाता है !जहर से नहीं मरता cardiac arrest से मर जाता है ! तो डर इतना है मन मे ! तो ये डर निकलना चाहिए !

वो डर कैसे निकलेगा ????

जब आपको ये पता होगा कि 550 तरह के साँप है उनमे से सिर्फ 10 साँप जहरीले हैं ! जिनके काटने से कोई मरता है ! इनमे से जो सबसे जहरीला साँप है उसका नाम है !
russell viper ! उसके बाद है karit इसके बाद है viper और एक है cobra ! king cobra जिसको आप कहते है काला नाग !! ये 4 तो बहुत ही खतरनाक और जहरीले है इनमे से किसी ने काट लिया तो 99 % chances है कि death होगी !

लेकिन अगर आप थोड़ी होशियारी दिखाये तो आप रोगी को बचा सकते हैं
होशियारी क्या दिखनी है ???

आपने देखा होगा साँप जब भी काटता है तो उसके दो दाँत है जिनमे जहर है जो शरीर के मास के अंदर घुस जाते हैं ! और खून मे वो अपना जहर छोड़ देता है ! तो फिर ये जहर ऊपर की तरफ जाता है ! मान लीजिये हाथ पर साँप ने काट लिया तो फिर जहर दिल की तरफ जाएगा उसके बाद पूरे शरीर मे पहुंचेगा ! ऐसे ही अगर पैर पर काट लिया तो फिर ऊपर की और heart तक जाएगा और फिर पूरे शरीर मे पहुंचेगा ! कहीं भी काटेगा तो दिल तक जाएगा ! और पूरे मे खून मे पूरे शरीर मे उसे पहुँचने मे 3 घंटे लगेंगे !

मतलब ये है कि रोगी 3 घंटे तक तो नहीं ही मरेगा ! जब पूरे दिमाग के एक एक हिस्से मे बाकी सब जगह पर जहर पहुँच जाएगा तभी उसकी death होगी otherwise नहीं होगी ! तो 3 घंटे का time है रोगी को बचाने का और उस तीन घंटे मे अगर आप कुछ कर ले तो बहुत अच्छा है !

क्या कर सकते हैं ?? ???

घर मे कोई पुराना इंजेक्शन (injection) हो तो उसे ले और आगे जहां सुई(needle) लगी होती है वहाँ से काटे ! सुई(needle) जिस पलास्टिक मे फिट होती है उस प्लास्टिक वाले हिस्से को काटे !! जैसे ही आप सुई के पीछे लगे पलास्टिक वाले हिस्से को काटेंगे तो वो injection एक सक्षम पाईप की तरह हो जाएगा ! बिलकुल वैसा ही जैसा होली के दिनो मे बच्चो की पिचकारी होती है !

उसके बाद आप रोगी के शरीर पर जहां साँप ने काटा है वो निशान ढूँढे ! बिलकुल आसानी से मिल जाएगा क्यूंकि जहां साँप काटता है वहाँ कुछ सूजन आ जाती है और दो निशान जिन पर हल्का खून लगा होता है आपको मिल जाएँगे ! अब आपको वो injection( जिसका सुई वाला हिस्सा आपने काट दिया है) लेना है और उन दो निशान मे से पहले एक निशान पर रख कर उसको खीचना है ! जैसी आप निशान पर injection रखेंगे वो निशान पर चिपक जाएगा तो उसमे vacuum crate हो जाएगा ! और आप खींचेगे तो खून उस injection मे भर जाएगा ! बिलकुल वैसे ही जैसे बच्चे पिचकारी से पानी भरते हैं ! तो आप इंजेक्शन से खींचते रहिए !और आप first time निकलेंगे तो देखेंगे कि उस खून का रंग हल्का blackish होगा या dark होगा तो समझ लीजिये उसमे जहर मिक्स हो गया है !

तो जब तक वो dark और blackish रंग blood निकलता रहे आप खिंचीये ! तो वो सारा निकल आएगा ! क्यूंकि साँप जो काटता है उसमे जहर ज्यादा नहीं होता है 0.5 मिलीग्राम के आस पास होता है क्यूंकि इससे ज्यादा उसके दाँतो मे रह ही नहीं सकता ! तो 0.5 ,0.6 मिलीग्राम है दो तीन बार मे आपने खीच लिया तो बाहर आ जाएगा ! और जैसे ही बाहर आएगा आप देखेंगे कि रोगी मे कुछ बदलाव आ रहा है थोड़ी consciousness (चेतना) आ जाएगी ! साँप काटने से व्यकित unconsciousness हो जाता है या semi consciousness हो जाता है और जहर को बाहर खींचने से चेतना आ जाती है ! consciousness आ गई तो वो मरेगा नहीं ! तो ये आप उसके लिए first aid (प्राथमिक सहायता) कर सकते हैं !

इसी injection को आप बीच से कट कर दीजिये बिलकुल बीच कट कर दीजिये 50% इधर 50% उधर ! तो आगे का जो छेद है उसका आकार और बढ़ जाएगा और खून और जल्दी से उसमे भरेगा !
तो ये आप रोगी के लिए first aid (प्राथमिक सहायता) के लिए ये कर सकते हैं !
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दूसरा एक medicine आप चाहें तो हमेशा अपने घर मे रख सकते हैं बहुत सस्ती है homeopathy मे आती है ! उसका नाम है NAJA (N A J A ) ! homeopathy medicine है किसी भी homeopathy shop मे आपको मिल जाएगी ! और इसकी potency है 200 ! आप दुकान पर जाकर कहें NAJA 200 देदो ! तो दुकानदार आपको दे देगा ! ये 5 मिलीलीटर आप घर मे खरीद कर रख लीजिएगा 100 लोगो की जान इससे बच जाएगी ! और इसकी कीमत सिर्फ पाँच रुपए है ! इसकी बोतल भी आती है 100 मिलीग्राम की 70 से 80 रुपए की उससे आप कम से कम 10000 लोगो की जान बचा सकते हैं जिनको साँप ने काटा है !

और ये जो medicine है NAJA ये दुनिया के सबसे खतरनाक साँप का ही poison है जिसको कहते है क्रैक ! इस साँप का poison दुनिया मे सबसे खराब माना जाता है ! इसके बारे मे कहते है अगर इसने किसी को काटा तो उसे भगवान ही बचा सकता है ! medicine भी वहाँ काम नहीं करती उसी का ये poison है लेकिन delusion form मे है तो घबराने की कोई बात नहीं ! आयुर्वेद का सिद्धांत आप जानते है लोहा लोहे को काटता है तो जब जहर चला जाता है शरीर के अंदर तो दूसरे साँप का जहर ही काम आता है !

तो ये NAJA 200 आप घर मे रख लीजिये !अब देनी कैसे है रोगी को वो आप जान लीजिये !
1 बूंद उसकी जीभ पर रखे और 10 मिनट बाद फिर 1 बूंद रखे और फिर 10 मिनट बाद 1 बूंद रखे !! 3 बार डाल के छोड़ दीजिये !बस इतना काफी है !

और राजीव भाई video मे बताते है कि ये दवा रोगी की जिंदगी को हमेशा हमेशा के लिए बचा लेगी ! और साँप काटने के एलोपेथी मे जो injection है वो आम अस्तप्तालों मे नहीं मिल पाते ! डाक्टर आपको कहेगा इस अस्तपाताल मे ले जाओ उसमे ले जाओ आदि आदि !!

और जो ये एलोपेथी वालो के पास injection है इसकी कीमत 10 से 15 हजार रुपए है ! और अगर मिल जाएँ तो डाक्टर एक साथ 8 से -10 injection ठोक देता है ! कभी कभी 15 तक ठोक देता है मतलब लाख-डेड लाख तो आपका एक बार मे साफ !! और यहाँ सिर्फ 10 रुपए की medicine से आप उसकी जान बचा सकते हैं !

और राजीव भाई बताते है कि injection जितना effective है मैं इस दवा(NAJA) की गारंटी लेता हूँ ये दवा एलोपेथी के injection से 100 गुना (times) ज्यादा effective है !

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तो ये जानकारी आप हमेशा याद रखे पता नहीं कब काम आ जाए हो सकता है आपके ही जीवन मे काम आ जाए ! या पड़ोसी के जीवन मे या किसी रिश्तेदार के काम आ जाए! तो first aid के लिए injection की सुई काटने वाला तरीका और ये NAJA 200 hoeopathy दवा ! 10 - 10 मिनट बाद 1 - 1 बूंद तीन बार
रोगी की जान बचा सकती है !!

आपने पूरी post पढ़ी बहुत बहुत धन्यवाद !!
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