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महात्मा जयोतिबा फुले ने शिवाजी की कब्र ढूँढी फिर वहां शिवाजी जयन्ति मनाई जाने लगी | इस जयन्ति को बंद करने के लिये, हिन्दू महासभा के लोकमान्य तिलक ने गणेश महोत्सव की शुरुआत की पहले गणपति महोत्सव की पुना से शुरूआत की थी, नौ दिन बाद गणपति को नहाने के लिये नदी की तरफ शोभायात्रा जा रहीं तब एक अछुत के लडके ने गणपति की प्रतिमा को छु कर अपवित्र कर दिया, पुना के बामनो ने सारा गुस्सा लोकमान्य तिलक पर उतारकर कहेने लगे की भगवान की प्रतिमा को इस तरह सार्वजनिक रखेंगे तो कोइ भी अछूत उसे अपवित्र करेगा, अब हम यह गणपति की प्रतिमा को किसी मन्दिर में नहीं रख सकते, तो लोकमान्य तिलक ने बामनो को बताया कि हम इस गणपति को नदी में डुबाकर अपनी शोभायात्रा पवित्र करेंगे, इस प्रकार हर साल गणपति विसर्जन की शुरुआत हुई |
यह किस्सा एकदम सत्य है, महाराष्ट्र के बहोत बड़े रेशनलिस्ट नरेन्द्र दाभोलकर ने अपनी किताब में लिखा है, एक साल पहले उनकी पुना मे हत्या हो गइ थी |
महात्मा जयोतिबा फुले ने शिवाजी की कब्र ढूँढी फिर वहां शिवाजी जयन्ति मनाई जाने लगी | इस जयन्ति को बंद करने के लिये, हिन्दू महासभा के लोकमान्य तिलक ने गणेश महोत्सव की शुरुआत की पहले गणपति महोत्सव की पुना से शुरूआत की थी, नौ दिन बाद गणपति को नहाने के लिये नदी की तरफ शोभायात्रा जा रहीं तब एक अछुत के लडके ने गणपति की प्रतिमा को छु कर अपवित्र कर दिया, पुना के बामनो ने सारा गुस्सा लोकमान्य तिलक पर उतारकर कहेने लगे की भगवान की प्रतिमा को इस तरह सार्वजनिक रखेंगे तो कोइ भी अछूत उसे अपवित्र करेगा, अब हम यह गणपति की प्रतिमा को किसी मन्दिर में नहीं रख सकते, तो लोकमान्य तिलक ने बामनो को बताया कि हम इस गणपति को नदी में डुबाकर अपनी शोभायात्रा पवित्र करेंगे, इस प्रकार हर साल गणपति विसर्जन की शुरुआत हुई |
यह किस्सा एकदम सत्य है, महाराष्ट्र के बहोत बड़े रेशनलिस्ट नरेन्द्र दाभोलकर ने अपनी किताब में लिखा है, एक साल पहले उनकी पुना मे हत्या हो गइ थी |

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